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जिला रीवा की डभौरा नगर परिषद में व्यापम जैसी भर्ती घोटाले का खुलासा


दिनांक : 23/12/25, भोपाल
भाजपा विधायक–अधिकारी गठजोड़ से हजारों करोड़ का भ्रष्टाचार – अमित शर्मा*

मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश महासचिव श्री अमित शर्मा ने आज एक पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। 

उन्होंने कहा कि भाजपा ने पिछले 20 वर्षों में “स्वर्णिम” और “विकसित मध्य प्रदेश” के जो दावे किए, वे आज भ्रष्टाचार, घोटालों और कागजी विकास तक सिमट कर रह गए हैं।

श्री शर्मा ने कहा कि रीवा जिले की डभौरा नगर परिषद, जो वर्ष 2020 में 7 ग्राम पंचायतों को मिलाकर बनाई गई थी, वहाँ व्यापम घोटाले की तर्ज पर एक संगठित भर्ती घोटाला किया गया है। इस पूरे मामले में स्थानीय भाजपा विधायक, तत्कालीन सीएमओ, जेडी एवं अन्य अधिकारियों की सीधी मिलीभगत सामने आई है।

उन्होंने आरोप लगाया कि नगर पंचायत के गठन के समय जो कर्मचारी पहले से वर्षों से कार्यरत थे, उनके वैधानिक अधिकारों को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया। नियमों के अनुसार उनका समायोजन और नियमितीकरण किया जाना था, लेकिन इसके विपरीत भाजपा विधायक के निजी सहायक (पीए), उनके रिश्तेदारों, सीएमओ, जेडी और अन्य अधिकारियों के पुत्र-पुत्रियों एवं परिजनों को अवैध रूप से एडजस्ट किया गया। 

 श्री अमित शर्मा ने बताया कि जहाँ नियम अनुसार केवल 21 पद स्वीकृत थे, वहाँ बिना विज्ञापन, बिना आरक्षण, बिना रोस्टर और बिना स्वीकृति के लगभग 50 लोगों की फर्जी भर्ती कर दी गई। इसके लिए ग्राम पंचायतों से फर्जी प्रस्ताव बुलवाए गए, झूठी कमेटियाँ बनाई गईं और पीआईसी/सामान्य सभा की बैठकों में नियम विरुद्ध प्रस्ताव पारित कराए गए। 

उन्होंने कहा कि इस दौरान फर्जी पे-स्लिप तैयार की गईं और कलेक्टर दर से अधिक वेतन दिखाकर 2 से 5 करोड़ रुपये तक की राशि अवैध रूप से तनख्वाह के नाम पर निकाल ली गई। एक-एक खाते से 50 से अधिक संदिग्ध ट्रांजैक्शन किए गए, जो खुलेआम वित्तीय अनियमितता को दर्शाते हैं।

श्री शर्मा ने जांच समिति पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जिन अधिकारियों पर भर्ती घोटाले के आरोप हैं, उन्हीं को जांच समिति में शामिल कर दिया गया, जिससे यह सिद्ध होता है कि घोटालेबाजों को ही अपनी जांच सौंप दी गई। इसके बावजूद अब तक किसी भी दोषी पर कार्रवाई नहीं हुई, क्योंकि भाजपा विधायक के दबाव में नगरीय प्रशासन मंत्री द्वारा कार्रवाई रोकी जा रही है।

उन्होंने कहा कि यह केवल एक नगर परिषद का मामला नहीं है। मध्य प्रदेश में लगभग 350 नगर पंचायतें हैं और यदि एक नगर परिषद में 2 से 5 करोड़ रुपये का घोटाला हो रहा है, तो यह हजारों करोड़ रुपये का प्रदेशव्यापी भ्रष्टाचार है।

अंत में श्री अमित शर्मा ने मांग की कि
इस पूरे मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कराई जाए,
अवैध नियुक्तियों को तत्काल निरस्त किया जाए,
दोषी विधायक, अधिकारी और कर्मचारियों पर कठोर कानूनी कार्रवाई हो,
तथा कांग्रेस पार्टी इस घोटाले को लोकायुक्त एवं न्यायालय तक ले जाएगी।

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