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मनरेगा की हत्या – मोदी सरकार ने काम का अधिकार छीना— श्री बी. के. हरिप्रसाद जी का वक्तव्य


दिनांक : 22 दिसंबर 2025
आज मध्य प्रदेश कांग्रेस कार्यालय, भोपाल में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के निर्देशानुसार कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) के सदस्य एवं पूर्व सांसद श्री बी. के. हरिप्रसाद जी ने पत्रकार वार्ता को संबोधित किया।

इस अवसर पर
 राज्यसभा सांसद श्री अशोक सिंह जी, मीडिया विभाग के अध्यक्ष श्री मुकेश नायक जी एवं प्रदेश प्रवक्ता विक्रम चौधरी, अभिनव बरोलिया, प्रवीण धौलपूरे, राहुल राज, फिरोज सिद्दीकी उपस्थित रहे।

श्री हरिप्रसाद जी ने कहा कि मोदी सरकार ने “सुधार” के नाम पर लोकसभा में एक और बिल पास कर दुनिया की सबसे बड़ी रोज़गार गारंटी योजना मनरेगा को खत्म करने का काम किया है। यह महात्मा गांधी के विचारों पर सीधा हमला है और देश के सबसे गरीब नागरिकों से काम का संवैधानिक अधिकार छीनने की सोची-समझी साजिश है।

मनरेगा, गांधी जी के ग्राम स्वराज, काम की गरिमा और विकेन्द्रीकृत विकास की अवधारणा का जीवंत उदाहरण रहा है। लेकिन मोदी सरकार ने न केवल महात्मा गांधी का नाम हटाया, बल्कि 12 करोड़ से अधिक NREGA मज़दूरों के अधिकारों को बेरहमी से कुचल दिया। पिछले दो दशकों से यह योजना करोड़ों ग्रामीण परिवारों के लिए जीवनरेखा रही है और कोविड-19 महामारी के दौरान यह सबसे महत्वपूर्ण सामाजिक सुरक्षा कवच साबित हुई।

उन्होंने कहा कि
 वर्ष 2014 से ही प्रधानमंत्री मोदी मनरेगा के खिलाफ रहे हैं और इसे “कांग्रेस की नाकामी की निशानी” कहा गया। पिछले 11 वर्षों में मोदी सरकार ने मनरेगा को व्यवस्थित रूप से कमजोर किया है—बजट में भारी कटौती, राज्यों के वैधानिक फंड रोकना, जॉब कार्ड रद्द करना और आधार आधारित भुगतान को अनिवार्य कर लगभग 7 करोड़ मज़दूरों को योजना से बाहर कर दिया गया। इसके परिणामस्वरूप पिछले पांच वर्षों में मनरेगा में औसतन केवल 50–55 दिन का काम ही मिल पाया है।

मनरेगा पर मोदी सरकार के हमले के मुख्य बिंदु

1. अधिकार से योजना तक गिरावट
मनरेगा, जो संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत अधिकार आधारित गारंटी थी, अब इसे एक सशर्त, केंद्र-नियंत्रित योजना में बदला जा रहा है। यह सुधार नहीं, बल्कि ग्रामीण गरीबों से संवैधानिक वादा छीनने की प्रक्रिया है।

2. राज्यों पर आर्थिक बोझ
मनरेगा पूरी तरह केंद्र द्वारा वित्तपोषित थी, लेकिन अब मोदी सरकार राज्यों पर लगभग ₹50,000 करोड़ का बोझ डालना चाहती है, जबकि नियम, ब्रांडिंग और श्रेय केंद्र अपने पास रखेगा। यह सहकारी संघवाद के साथ धोखा है।

3. रोज़गार पर सरकारी नियंत्रण
नई व्यवस्था के तहत सरकार तय समय पर रोज़गार बंद कर सकती है। फंड खत्म होते ही या फसल के मौसम में मजदूरों को महीनों तक काम से वंचित किया जा सकता है। यह कल्याण नहीं, बल्कि राज्य-नियंत्रित श्रम शोषण है।

4. विकेंद्रीकरण का अंत
ग्राम सभा और पंचायतों के अधिकार छीनकर उन्हें केंद्रीकृत डिजिटल सिस्टम, GIS मैपिंग, बायोमेट्रिक और एल्गोरिदमिक निगरानी के हवाले किया जा रहा है, जिससे स्थानीय ज़रूरतों की अनदेखी हो रही है।

5. मांग आधारित व्यवस्था समाप्त
मनरेगा की मांग आधारित प्रकृति खत्म कर इसे सीमित बजट वाली केंद्र-निर्धारित योजना बनाया जा रहा है, जिससे रोज़गार का कानूनी अधिकार समाप्त हो रहा है।

श्री हरिप्रसाद जी ने कहा कि यह कदम महात्मा गांधी के आदर्शों का अपमान और ग्रामीण भारत पर खुला हमला है। रिकॉर्ड बेरोज़गारी के बाद अब गरीब ग्रामीण परिवारों की आखिरी आर्थिक सुरक्षा को भी निशाना बनाया जा रहा है। कांग्रेस पार्टी इस जन-विरोधी, मज़दूर-विरोधी और संघीय ढांचे पर हमले का विरोध सड़क से लेकर संसद तक करेगी।

 नेशनल हेराल्ड मामला : सच की जीत 
श्री हरिप्रसाद जी ने कहा कि 12 वर्षों बाद कांग्रेस को बदनाम करने के लिए गढ़ा गया नेशनल हेराल्ड “केस” बुरी तरह ढह गया है। माननीय न्यायालय द्वारा ED का मामला खारिज किया जाना मोदी-शाह की बदले की राजनीति पर करारा तमाचा है।

उन्होंने कहा कि यह केस कभी कानून का मामला नहीं था, बल्कि कांग्रेस नेतृत्व—श्रीमती सोनिया गांधी जी और श्री राहुल गांधी जी—को डराने और बदनाम करने की साजिश थी। न्यायालय ने साफ कहा कि इस मामले में कोई मूल अपराध ही नहीं था, फिर भी राजनीतिक दबाव में जांच एजेंसियों का दुरुपयोग किया गया।

न्यायालय ने यह भी दर्ज किया कि—
CBI ने 2014 और 2015 में FIR दर्ज करने से इनकार किया था
ED ने भी वर्षों तक मनी लॉन्ड्रिंग जांच शुरू नहीं की
2021 में अचानक केस दर्ज करना राजनीतिक बदले का उदाहरण है
डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी अधिकृत शिकायतकर्ता नहीं थे
PMLA के तहत आवश्यक कानूनी मानक पूरे नहीं हुए

श्री हरिप्रसाद जी ने कहा कि राहुल गांधी जी से 50 घंटे की पूछताछ केवल मीडिया ट्रायल और राजनीतिक प्रतिशोध था। लेकिन कांग्रेस पार्टी न झुकी है, न झुकेगी।

उन्होंने कहा,
“सच की जीत हुई है और सच की हमेशा जीत होगी। कोई भी एजेंसी, कोई भी धमकी लोकतंत्र और संविधान की आवाज़ को दबा नहीं सकती।”
कांग्रेस पार्टी लोकतंत्र, संविधान और संस्थाओं को BJP के दुरुपयोग से बचाने की लड़ाई पूरी ताकत से जारी रखेगी।



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